कोई भी समस्या, हमेशा नई होती है… पर क्या हमारे पास हमेशा नया जवाब होता है?

प्रत्येक चुनौती को स्वाभाविक ही अपरिहार्यत: नया प्रत्युत्तर चाहिए होता है क्योंकि आज समस्या उससे बिल्कुल ही भिन्न होती है जो कि वो कल थी। हर समस्या हमेशा नई होती…

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प्रतिबद्ध या बंधा हुआ मन …स्वस्थ नहीं होता

संगठित धर्मों के मध्य जो सामाजिक अन्याय, सामाजिक दुर्दशा, सामाजिक नैतिकता और संस्कृति के हालात हैं, इन्हें देखें और यदि इनकी वैधता को मनोवैज्ञानिक रूप से नकारें, तो शायद हम…

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हम और हमारी दुनिया

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दो विपरीतों में कार्यरत मन के कार्यक्षेत्र– से निगेटिव थिंकिंग कैसे भिन्न है?

तो मन में संपूर्ण रूपांतरण तभी घटता है जब निषेधात्मक नकारात्मक सोच हो। जैसे कि मैंने पहले कहा ‘सोच विचार’ का आधार सदैव शब्द या प्रतीकचिन्ह होते हैं। मुझे नहीं…

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धारणा या विश्वास, आत्म ज्ञान में बाधक हैं

अगर हमारी कोई धारणा या विश्वास ना हो, तो हमारे साथ क्या होगा? क्या हम इस बात से भयभीत नहीं हो जाएंगे कि ‘‘अब क्या होगा?’’ यदि हमारे पास ईश्वर…

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जब तक आप बदलाव चाहेंगे – बोर होंगे … दुखी होंगे

एक मन जो किसी तरह के परिवर्तन’बदलाव की फिराक में नहीं रहता, उस मन में ही कोई भय नहीं होता.अगर्व या विनम्रता में संपूर्ण संहार समाहित है— बाहरी ही नहीं,…

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